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National Executive 2017

Salient points of speech by Hon'ble Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing concluding session of BJP National Executive Meeting at NDMC Convention Centre, New Delhi

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक के समापन सत्र में दिए गए उद्बोधन के मुख्य बिंदु

  • हम पिछले दो दिनों से देश और दल के बारे में विस्तृत चर्चा कर रहे हैं, हमारी चर्चा जन-मन का प्रतिबिम्ब है क्योंकि हम वे लोग हैं जो धरती से जुड़े हुए कार्यकर्ता हैं और इसके कारण हमारे पास जमीनी सच्चाई को परखने की ताकत है। हम वो नहीं जो हवा के रुख में बह जाएँ, हम वो हैं जो हवा का रुख भांपकर, समझकर उसे मोड़ना जानते हैं।
  • जो शासन में बैठे हैं, उनके लिए भी यह मंथन, मार्गदर्शक का काम करता है। यह चिंतन, मनन और सुझाव हमारे लिए काफी मायने रखती हैं। इस संदर्भ में यह मेरे लिए और मेरे जैसे तमाम पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए पार्टी द्वारा दिए गए दायित्त्व को निर्वहन करने का संबल है, विचारों का सम्पुट है।
  • जब हम शासन में नहीं होते हैं, विपक्ष में रहते हैं तो दल की गतिविधि को चलाना अपेक्षाकृत सरल होता है लेकिन जब हम शासन में होते हैं तो ऐसे समय में संगठन को गति देना काफी कठिन होता है।
  • संगठन के लोगों को हर वक्त तलवार की धार पर चलना होता है। संगठन में काम करने वालों पर दोहरा दवाब होता है। हमें यह कहते हुए गर्व की अनुभूति हो रही है कि भारतीय जनता पार्टी में वर्तमान में नीचे से ऊपर तक उत्तम तरीके से उत्तम संतुलन के साथ अच्छे तरीके से पार्टी की गतिविधियों को चलाया जा रहा है। सरकार में बैठे लोगों को इस बेहतर तालमेल की बदौलत चिंता की कोई जरूरत नहीं करनी पड़ती। इसका मूल कारण यह है कि शासन व्यवस्था और संगठन व्यवस्था के बीच जीवंत तालमेल और जीवंत अनुबंधन है।
  • काले-धन की समस्या है, हम यह लड़ाई लड़ रहे हैं और हम इसको जीतेंगें भी, इसमें कोई दो राय नहीं है लेकिन समाज की ऐसी शक्ति का दर्शन शायद ही किसी को देखने का सौभाग्य कभी प्राप्त होता है जो इस बार भारतीय जनता पार्टी को मिला है। राष्ट्र पर बाहरी शक्तियों के आक्रमण के वक्त लड़ने के लिए देश इकट्ठा हो जाए, यह सहज व स्वभाविक है लेकिन इस तरह के फैसले को जब देश की जनता-जनार्दन का इतना अभूतपूर्व समर्थन मिलता है तब बात ही कुछ और होती है - कुछ तो बात है ऐसी कि हस्ती मिटती नहीं हमारी। जब भी हमारे अंदर बुराई आती है, हम खुद ही इससे लड़ने को खड़े हो जाते हैं। अस्पृश्यता, बाल-विवाह, अशिक्षा - इन सभी बुराइयों से लड़ने हम खुद ही तो खड़े हुए। यह घटनाक्रम उसी तारीख का हिस्सा है कि किस तरह अपने अंदर की बुराई से लड़ने के लिए हमने अपने अंदर सिंचित सच्चाई और अच्छाई की ऊर्जा का उपयोग किया और विजय श्री हासिल की।
  • बेनामी संपत्ति की शुरुआत भी कहीं-न-कहीं कैश करेंसी से ही होती है। जब तक हम इसकी मूल धारा को रोकने की व्यवस्था नहीं करते, हम काले-धन को व्यवस्था से बाहर नहीं कर सकते।
  • भारत ने देश की 86% चलन की मुद्रा को ख़त्म करके जो दिखाया है, यह निर्णय की सफलता नहीं बल्कि देश के गरीब से गरीब व्यक्ति की समझदारी की सफलता है। हमने जितनी चलन की करेंसी अर्थव्यवस्था से ख़त्म की है वह विश्व के लगभग 60-70% देशों की टोटल करेंसी के बराबर है।
  • जब देश के गरीब-से-गरीब लोगों को लगता है कि यही रास्ता है जो शायद हमें बचाएगा, हमें सशक्त बनाने में सहायक होगा, तब हमारी जिम्मेवारी और बढ़ जाती है।
  • आखिर क्या कारण है कि छतीसगढ़ की 90 साल की एक बुजुर्ग महिला अपनी बकरी बेचकर गाँव का पहला टॉयलेट बनवाती है और लोगों को खुले में शौच के लिए न जाने की प्रेरणा देती है। इसका मतलब यह है कि हमारी सारी योजनायें जन-सामान्य से जुड़ी हुई है।
  • अन्य राजनीतिक दलों के लिए गरीबी चुनाव मे भुनाने का एक मुद्दा हो सकता है लेकिन यह हमारे लिए गरीबों का उत्थान, उनकी सेवा का अवसर है। गरीब हमारे लिए मदद नहीं, सेवा का क्षेत्र है। हमारी विधि, वाणी, निर्णय और प्रक्रिया के केंद्र बिंदु में गरीब नहीं रहेगा तो हम अपने आप को कभी भी माफ़ नहीं कर पायेंगें।
  • हमारे देश में दो प्रकार की सामाजिक स्थिति है। एक तरफ वो वर्ग है जिसके लिए लाइफ स्टाइल की अहमियत बहुत बड़ी है, दूसरी तरफ एक बहुत बड़ा तबका है जो क्वालिटी ऑफ़ लाइफ के लिए जूझ रहा है। हमारे सामने दो रास्ते हैं। हमने लाइफ स्टाइल नहीं, क्वालिटी ऑफ़ लाइफ में परिवर्तन लाने का रास्ता चुना है। हमारी पूरी सोच का दायरा समर्पण और कर्त्तव्य भाव से इसे पूरा करने का संकल्प होना चाहिए।
  • भारतीय जनता पार्टी के लाखों कार्यकर्ता ऐसे हैं जिन्हें ‘भारत माता की जय' के सिवा कुछ और नहीं चाहिए।
  • वाराणसी में बूथ कार्यकर्ताओं के साथ नीचे बैठकर चपाती खाने का अनुभव मेरे लिए चिर-स्मरणीय रहेगा। यह मेरे जीवन का अभूतपूर्व क्षण था।
  • निर्णय तो पहले की सरकारें भी लिया करती थी लेकिन उसकी कभी मॉनिटरिंग सही से नहीं होती थी। फैसले फाइलों की धूल फांकते रहते थे। हमारी सरकार हर निर्णय का हर दिन हिसाब लेती है।
  • क्या हमें इस बात के लिए पीड़ा नहीं होनी चाहिए थी कि आजादी के 70 साल बाद भी देश के 18000 गाँव अँधेरे में जीवन यापन करने को मजबूर थे?
  • गरीब छात्रों को पढ़ाई के लिए सोलर लाइट देने की व्यवस्था की जा रही है। बेटी बचाओ-बेटी पढाओ योजना क्या है - यह सब गरीबों के उत्थान की ही योजनायें हैं। सबसे ज्यादा अशिक्षा माइनॉरिटीज वर्ग में है, गरीब वर्ग में है, हम वहां की व्यवस्था बदलने के लिए प्रयास कर रहे हैं ताकि उनके जीवन को सुधारा जा सके।
  • हम गरीबों के लिए सरकार की योजनाओं को चिह्नित करें और इसे लोगों तक ले जाए, उन्हें इसकी जानकारी दें और इससे लाभ उठाने के लिए प्रेरित करें।
  • गरीबी से लड़ना है तो गरीब को ताकतवर बनाना होगा। गरीबी को परास्त करने की ताकत देश के गरीबों में ही है, जरूरत इस बात की है कि उन्हें अवसर दिए जाएँ। यदि हमारी सारी योजनाओं के मूल में इस बात पर बल दिया जाय तो हम निश्चित रूप से देश से गरीबी को ख़त्म करने में सफल होंगें, इसमें कोई संशय नहीं है।
  • मैं इस अवसर पर राजा रंतिदेव का जिक्र करना चाहूंगा। उन्होंने कहा था - न मुझे राज्य की कामना है, न ही मोक्ष अथवा ऐश्वर्य की, मुझे तो गरीबों के आंसू पोंछने की कामना है। हम उस शासन व्यवस्था के लोग हैं। इतिहास ऐसे मौके कभी किसी को नहीं देता जैसा मौक़ा इस बार भारतीय जनता पार्टी को प्राप्त हुआ है।
  • देश बदलने को तैयार है, हम ही कहीं न पीछे रह जाएँ।
  • डिजिटल इंडिया का नोटबंदी से कोई लेना-देना नहीं है। डिजिटल इंडिया की प्रक्रिया काफी समय से चल रही है। ई-गवर्नेंस का आज के समय में कितना महत्त्व है, यह समझने की जरूरत है। डिजिटाईजेशन अब हमारे सामाजिक जीवन की प्रक्रिया का एक महत्त्वपूर्ण अंग बन गया है। यदि भारतीय जनता पार्टी के 11 करोड़ कार्यकर्ता इस अभियान को अपना मानकर चल पड़ें तो हम इसके बल पर देश की इकॉनमी को बदल सकते हैं।
  • आने वाले पांच राज्यों के विधान सभा चुनावों के जो दृश्य उभर कर सामने आ रहे हैं, यह काफी हौसला बढ़ाने वाला है। यदि हवा का रुख हमारे लिए अनुकूल है तो हमें इसका फायदा उठाना चाहिए।
  • सार्वजनिक राजनीतिक जीवन में पारदर्शिता आने वाली है। राजनीतिक दलों को चंदे के लिए पारदर्शी रास्ते अपनाने ही पड़ेंगें। हमें इस अभियान को आगे बढ़ कर लीड करना चाहिए। हमें डरने की कोई जरूरत नहीं है, देश के करोड़ों-करोड़ जनता-जनार्दन का आशीर्वाद हमारे साथ है। हम देश की राजनीति में पारदर्शी व्यवस्था के पक्ष में हैं। हमें इस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
  • हम एक विशिष्ट जिम्मेदारी निभाने वाले दल हैं। मैं गरीबी में जन्मा, गरीबी में जिया। मैं गरीबी के दर्द को समझता हूँ। देश में करोड़ों गरीब लोग मुसीबतें झेल रहे हैं। हमने उनकी भलाई की राह पर सतत आगे बढ़ते रहना चाहिए। देश में करोड़ों गरीब लोग मुसीबतें झेल रहे हैं। हमने उनकी भलाई की राह पर सतत आगे बढ़ते रहना चाहिए। हमें आलोचनाओं का स्वागत करना चाहिए और आरोपों से घबराना नहीं चाहिए। हम सच्चाई और अच्छाई की राह पर चलें और देश के पुनर्निर्माण में सहायक बनें।
  • पांच राज्यों में होने वाले चुनाव में लगे कार्यकर्ताओं को बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

(महेंद्र पांडेय)
कार्यालय सचिव